कैसे कहूं मैं तुमसे, कुछ आदत सी बन गई है तुझसे,
तुम मेरी जुस्तजू , मेरी दीवानगी
मेरी जिंदगी, मेरी पूरी दुनिया बदल गई है तुमसे।
बेइंतहा इश्क, और हद से ज्यादा पागलपन,
एक अजीब सी लत लग गई है तुमसे।
मन की तेज वर्षा में एक सोनी धूप जैसी,
इस तनाव भरे समुंदर में एक सुकून सा किनारा मिला हो जैसे तुमसे ।
तुम्हें कभी पा नहीं सकती, फिर भी तुम्हें खोने का डर,
हंसी आती है मेरे पागल मन के इस बेवकूफ सोच से।
मेरी मान और सारे सिद्धांतों से जैसे मैंने मुंह फेर लिया हो,
यह जोखिम भरे कदम कहां और कब रुकेंगे यह डर से एक रिश्ता बन गया हो जैसे।
कैसे कहूं मैं तुमसे, वास्तविकता से दूर, यह रूहानी अटूट संबंध में, बस साथ रहना चाहती हूं तुमसे।
- Sharon Lasrado.
तुम मेरी जुस्तजू , मेरी दीवानगी
मेरी जिंदगी, मेरी पूरी दुनिया बदल गई है तुमसे।
बेइंतहा इश्क, और हद से ज्यादा पागलपन,
एक अजीब सी लत लग गई है तुमसे।
मन की तेज वर्षा में एक सोनी धूप जैसी,
इस तनाव भरे समुंदर में एक सुकून सा किनारा मिला हो जैसे तुमसे ।
तुम्हें कभी पा नहीं सकती, फिर भी तुम्हें खोने का डर,
हंसी आती है मेरे पागल मन के इस बेवकूफ सोच से।
मेरी मान और सारे सिद्धांतों से जैसे मैंने मुंह फेर लिया हो,
यह जोखिम भरे कदम कहां और कब रुकेंगे यह डर से एक रिश्ता बन गया हो जैसे।
कैसे कहूं मैं तुमसे, वास्तविकता से दूर, यह रूहानी अटूट संबंध में, बस साथ रहना चाहती हूं तुमसे।
- Sharon Lasrado.
Loved it like I always do! Very well written, could feel your feelings through your words😊👍👌💞💞
ReplyDeleteThank you Sassy Suzz.
Deleteक्या बात है😍बोहोत बढ़िया बयान किया है, दिल की कश्मकश का, वाह वाह!!
ReplyDeleteThank you VS
DeleteWah wah... kya baat hain 👌🏻
ReplyDeleteThank you Sangeeta.
DeleteBeautiful Sharon... Keep writing more often👌😍
ReplyDeleteThank you Niloofer.
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